राष्ट्रीय

पुणे के इस NGO में तैयार होते हैं भारत के लिए ओलंपिक चैंपियन

[ad_1]

पुणे: भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने पहले दिन कुल 202 किग्रा का भार उठाया और रजत पदक जीतकर भारत को टोक्यो ओलंपिक में अपने अभियान की शानदार शुरुआत दिलाई. 85 पदक स्पर्धाओं में चुनौती पेश करने वाले 119 एथलीटों का दल टोक्यो पहुंचा, जो ओलंपिक के किसी एक संस्करण में भारत का सबसे बड़ा दल है. इससे यह स्पष्ट रूप से दिखता है कि बीते कुछ सालों में भारत की खेल संस्कृति में किस हद तक विकास हुआ है.

एक एथलीट में से एक चैंपियन निकालने के लिए तमाम तरह के बलिदानों और शारीरिक दर्द के साथ कई तरह की चुनौतियों का सामना करना होता है. एक चैंपियन बनाने के लिए अपने लिए सीमाएं तय करने, फिर उन्हें लांघने और इस दौरान राह में आने वाले बाधाओं पर काबू पाना होता है. इस तमाम सफर में हर खिलाड़ी को एक सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है, जो उसके हर उतार-चढ़ाव में लगातार उसका साथ देता रहे. खेल और उसके एथलीटों की बेहतरी की दिशा में काम सरकार के साथ-साथ महासंघ भी तत्परता से काम कर रहे हैं लेकिन हाल के दिनों में देश ने व्यक्तिगत संस्थाओं के उद्भव को भी देखा है जो आगे आकर भारतीय खेल के विकास में योगदान दे रहे हैं. ऐसे संगठनों में से ही एक पुणे स्थित एनजीओ ‘लक्ष्य’ है.

एनजीओ ‘लक्ष्य’ का उद्देश्य
‘लक्ष्य’ की स्थापना साल 2009 में हुई थी और तब से लेकर आज तक यह दशक से अधिक समय से बड़े अंतरराष्ट्रीय मल्टी स्पोटर्स इवेंट्स में पदक जीतने की भारत की संभावनाओं को बढ़ाने के उद्देश्य से काम कर रहा है. लक्ष्य के महासचिव सुंदर अय्यर ने कहा , “हम हमेशा खेलों के लिए कुछ करना चाहते थे और इसी उद्देश्य के साथ लक्ष्य की स्थापना हुई. टेनिस खिलाड़ी अंकिता रैना, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भाग लिया, उन पांच शुरुआती एथलीटों में शामिल रही हैं, जिन्हें हमने शुरू में पहचाना और फिर उन्हें निखारने के लिए काम करना शुरू किया. हम 10 से अधिक सालों से लगातार खेलों के विकास पर काम कर रहे हैं.”

भारतीय खेलों में अपने अपार योगदान के लिए 2020 के राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित-लक्ष्य जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार करने के लिए काम करता रहा और यही इसका प्रमुख उद्देश्य भी रहा है. टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा ले रहीं बॉक्सर पूजा रानी और सिमरनजीत कौर इस बात का एक आदर्श उदाहरण हैं कि कैसे लक्ष्य जैसे संगठनों के समर्थन से एक खिलाड़ी को चैंपियन के रूप में तैयार किया जा सकता है.

अय्यर ने कहा, “हमने 2016 में सिमरनजीत को नेशनल टूर्नामेंट के दौरान देखा. हमने उनके कोच, राष्ट्रीय टीम के कोच से बात की और उनका मार्गदर्शन करना और उन्हें नर्चर करना शुरू किया. अब देखिए कि पांच साल के भीतर वह ओलंपिक खेल रही हैं. यह हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है. इसमें सरकार, बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया और कोचों की भी अहम भूमिका होती है. हम उनकी यात्रा में योगदान देकर वास्तव में खुश हैं. पूजा रानी के साथ भी हमारी कुछ ऐसी ही कहानी है. ये दोनों कई सालों से हमारे साथ जुड़ी हुई हैं.”

परिवार की तरह खिलाड़ियों की देखभाल करती है लक्ष्य
लक्ष्य लगातार खिलाड़ियों के साथ काम कर रहा है और एक परिवार की तरह उनकी देखभाल कर रहा है. मुक्केबाज सिमरनजीत और पूजा रानी के साथ-साथ, टेबल टेनिस स्टार अचंता शरथ कमल और महिला टीटी खिलाड़ी सुतीर्था मुखर्जी, निशानेबाज संजीव राजपूत और रेसवॉकर संदीप कुमार छह लक्ष्य समर्थित एथलीट हैं जो टोक्यो ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

अपने खिलाड़ियों को विरोधियों पर बढ़त हासिल करने का साहस और दमखम प्रदान करने के लिए, लक्ष्य पोषण (न्यूट्रीशन काउंसलिंग) परामर्श, स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग प्रशिक्षण, एक व्यक्तिगत फिजियोथेरेपिस्ट और मानसिक दृढ़ता कोचिंग (मेंटल टफनेस कोचिंग) सहित प्रदर्शन-बढ़ाने वाली सुविधाएं प्रदान कर रहा है. साथ ही खिलाड़ियों को जब भी आवश्यकता हो, वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है. आज के खेल जगत ने भी प्रौद्योगिकी की भागीदारी को देखा है और खेल विज्ञान इसका एक अभिन्न अंग बन गया है.

2024 और 2028 ओलंपिक की तैयारी 
विभिन्न खेलों से अब तक 80 से अधिक खिलाड़ियों को समग्र समर्थन देने के बाद, लक्ष्य वर्तमान में विश्व स्तर के एथलीट बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. उद्देश्य यह है कि ये एथलीट पूरी तरह तैयार होकर 2024 और 2028 ओलंपिक खेलों में भारत के लिए गौरव हासिल कर सकें.

लक्ष्य किस तरह से फ्यूचर स्टार्स को तैयार करने के लिए काम कर रहा, इस पर प्रकाश डालते हुए अय्यर ने आगे कहा, “जब हम पदक के बारे में बात करते हैं, तो ओलंपिक में भागीदारी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. युवाओं को एक सफल पेशेवर खिलाड़ी में बदलना और आवश्यक समर्थन के साथ उस अंतर को पाटना हमारा उद्देश्य शुरू से ही रहा है. वर्तमान में, हमारे पास लगभग 35 जूनियर खिलाड़ी हैं और हम 2024 और 2028 के ओलंपिक खेलों में अधिक से अधिक भागीदारी और अधिक से अधिक पदक जीतने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.”

लक्ष्य टीम में संस्थापक-अध्यक्ष  मनीष जैन, अध्यक्ष विशाल चोरडिया, उपाध्यक्ष स्वास्तिक सिरसीकर और  आशीष देसाई, सचिव सुंदर अय्यर और सदस्य जीएम अभिजीत कुंटे शामिल हैं और लक्ष्य को पता है कि चैंपियन बनाने के लिए वास्तव में क्या करना पड़ता है. भारतीय एथलीटों के समर्थन में लक्ष्य जैसे संगठनों के आने से एक बात तो तय हो गई है कि आने वाले समय में भारतीय खेल जगत में बड़ी उपलब्धियों की अनेकों इबारतें लिखी जाएंगी.

ये भी पढ़ें-
नपुंसकता का झूठा आरोप तलाक का आधार, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रखा बरकरार

ओलंपिक में पुरुष हॉकी टीम की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- ये दिन हर भारतीय की याद में रहेगा

[ad_2]
Source link

Aamawaaz

Aam Awaaz News Media Group has been known for its unbiased, fearless and responsible Hindi journalism since 2018. The proud journey since 3 years has been full of challenges, success, milestones, and love of readers. Above all, we are honored to be the voice of society from several years. Because of our firm belief in integrity and honesty, along with people oriented journalism, it has been possible to serve news & views almost every day since 2018.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button