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नन रेप मामले में बिशप फ्रैंको मुलक्कल बरी, ननों ने कहा- फैसले के खिलाफ करेंगी अपील

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Bishop Franco Mulakkal Acquitted: केरल में कोट्टायम की एक अदालत ने बिशप फ्रैंको मुलक्कल को नन से बलात्कार के आरोपों से शुक्रवार को बरी कर दिया. इस फैसले के बाद पीड़िता की समर्थक ननों ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जताते हुए निराशा प्रकट की और कहा कि न्याय मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. वहीं खुश दिख रहे बिशप ने अपने अनुयायियों सेप्रभु का गुणगान करने व प्रसन्न रहनेकी अपील की.

बिशप को बरी करते हुए कोट्टायम के अतिरिक्त जिला अदालत के न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता का यह दावा कि उसके साथ 13 बार बलात्कार किया गया, उसके एकमात्र गवाही पर भरोसा के लायक नहीं है. यह रेखांकित करते हुए कि पीड़िता की गवाही एक समान नहीं रही है, अदालत ने कहा कि पीड़िता ने अपनी साथियों के साथ जो तकलीफ बांटी है उसमें कहा कि उसके (बिशप) यौन इच्छाओं के सामने नहीं झुकने पर उसे (नन) परेशान किया जा रहा है, वहीं पीड़िता ने अदालत में अपने बयान में कहा कि 13 बार उसके साथ बलात्कार किया गया है.

यह रेखांकित करते हुए कि पीड़िता ने सबसे पहले डॉक्टर के समक्ष कहा था कि उसके साथ यौन संबंध नहीं बनाया गया है. अदालत ने विभिन्न फैसलों का हवाला दिया और कहा कि पीड़िता के बयान में बारबार हुए बदलाव को देखते हुए अदालत का मानना है कि उसे ठोस गवाह नहीं माना जा सकता है और न ही उसे पूरी तरह विश्वास योग्य माना जा सकता है. अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयान के अलावा ‘‘अभियोजन के मुकदमे को साबित करने के लिए अन्य कोई ठोस सबूत नहीं है.’’

ननों ने कहा फैसले के खिलाफ करेंगी अपील
पीड़िता और उनकी समर्थक नन दक्षिण केरल में कुराविलांगड कानवेंट में रहती हैं. न्याय के लिए ननों के संघर्ष का चेहरा रही सिस्टर अनुपमा ने कहा कि वे निश्चित ही इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगी और अपनी बेबस सहयोगी की लड़ाई को आगे ले जाएंगी. उन्होंने कहा, ‘‘जो अमीर और प्रभावशाली हैं वे इस समाज में कुछ भी कर सकते हैं. समाज में यही हम अपने आसपास देखते हैं. हमने इस मामले की बहस के समय तक कुछ भी अजीब महसूस नहीं किया. हमारा मानना है कि उसके बाद इसे (मामले को) बिगाड़ दिया गया.’’

नन ने जून 2018 में पुलिस को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 2014 से 2016 के बीच मुलक्कल ने उनका यौन शोषण किया था. वह तब रोमन कैथोलिक चर्च के जालंधर डायोसिस के बिशप थे. कोट्टायम जिले की पुलिस ने जून 2018 में ही बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया था. मामले की तहकीकात करने वाले विशेष जांच दल ने बिशप को सितंबर 2018 में गिरफ्तार किया था और उन पर बंधक बनाने, बलात्कार करने, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगाये थे. मामले में नवंबर 2019 में सुनवाई शुरू हुई, जो 10 जनवरी को पूरी हुई थी.

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