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‘करमा बाई को खीचडो’ नृत्य नाटिका में दिखा भक्त और भगवान का प्रेम

लखनऊ। भगवान भाव के भूखे है। यदि भगवान के प्रति हमारा सच्चा प्रेम है तो उन्हें खोजने की जरुरत नही, वह हर पल हमारे साथ है। कुछ इसी बात का दर्शाता ‘करमा बाई को खीचडो’ नृत्य नाटिका का मंचन गुरुवार को बीरबल साहनी मार्ग स्थित श्री श्याम मन्दिर में किया गया।

श्री श्याम परिवार लखनऊ की ओर से देबाजीत डांस ग्रुप द्वारा मंचित ‘करमा बाई को खीचडो’ व डाकिया डाक लाया नृत्य नाटिका का मंचन किया गया। नाटक मंचन से पूर्व श्री श्याम परिवार लखनऊ व फागुनोत्सव संयोजक प्रशांत डालमिया, राधेमोहन अग्रवाल, अजय झुनझुनवाला, प्रदीप अग्रवाल, विजय अग्रवाल, गोविन्द अग्रवाल, सुधीर खेतान आदि लोगों ने कलाकारो को सम्मानित किया।
उसके बाद नाटक की शुरुआत हुई। कर्माबाई में भगवान के प्रति अगाध प्रेम को जिस प्रकार सुन्दरता और मिठास के साथ दिखाया कि लोगों के आंखो मे आंसू छलक आये।

नाटक में दिखया कि राजस्थान के नागौर जिले के एक गांव में जीवन राम डूडी के घर 1615 में एक बेटी का जन्म हुआ। चेहरे पर एक अनोखी आभा थी बचपन से ही उसमें भक्ति भाव के संस्कार थे। कर्मा 13 वर्ष की हो गई एक बार जीवन राम को कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए पुष्कर जाना था उनकी पत्नी भी उनके साथ जा रही थी वह करमा को भी साथ ले जाना चाहते थे लेकिन एक समय आ गया उनकी अनुपस्थिति में भगवान को भोग कौन लगाता। करमा को भोग की जिम्मेदारी सौपकर चले गये।
अगले दिन करमा ने सुबह बाजरे का खिचड़ा बनाया उसमें खुब घी डाला और पूजा के लिए भगवान की मूर्ति के पास आ गई। हाथ जोड़कर भोग लगाने की प्रार्थना की। पर प्रभु नही आये। भक्त और भगवान का यह खेल काफी देर चलता रहा। आखिरकार अंत में भगवान को आना पडा और खिचडे का भोग लगाया।

कुछ दिन बाद करमा के माता पिता घर आये और जब यह सब पता चला तो आश्चर्यचकित हो गये। जिस ईश्वर के लिए वे तीर्थ यात्रा करने गए थे जिसे लोग ना जाने कहां कहां ढूंढ रहे हैं उसे उनकी बेटी ने अपने हाथ से खीचडे का भोग लगाया। उसी दिन से करमा बाई जगत में विख्यात हो गई।
मंच संचालन कर रहे यश टिबरेवाल द्वारा नाटक के बीच बीच में भजन ‘‘थाणी भर के ल्याई रे खीचड़ो, ऊपर घी की बाटकी’’ सुनाया तो दरबार बाबा के जयकारो से गूंज उठा। अगले क्रम में जब उन्होंने ‘‘संचो प्रेम प्रभु में हो तो मुरती बोलै काठ की…, सुनाया तो श्री श्याम परिवार लखनऊ के वीरेन्द्र अग्रवाल, प्रशांत डालमिया, रूपेश अग्रवाल, शिव सिघानिया, नीलेश अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, महावीर प्रसाद अग्रवाल, गणेश प्रसाद अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, सुधीर कुमार गर्ग, सत्य नारायण अग्रवाल, राधेश्याम अग्रवाल, भारत भूषण गुप्ता, मदन लाल जिन्दल समेत अन्य लोग झूमने लगे। बाद में श्याम बाबा को आठ बडी संस्थाओं द्वारा सवामणी का भोग लगाया गया।

खाटू मेला बना आकर्षण का केन्द्र

फागुन उत्सव संयोजक प्रशांत डालमिया ने बताया कि खाटू श्याम मन्दिर में चल रहा  खाटू मेला लोगों को खूब भा रहा है। उन्होंने बताया कि जहां एक ओर बच्चे व बडे झूले का आनन्द ले रहे है तो वही मेले में लोग ऊंट की सैर कर रहे है। मेले में श्याम बाबा के साथ सेल्फी लेने के लिए सेल्फी प्वाइंट बनाये गये है। इसके अलावा 40-45 स्टाल पर लोग खरीदारी कर रहे है। इन स्टालो में जयपुर के पापड, बेलपूडी, बुटीक के अलावा राजस्थान के स्वादिष्ट व्यंजनों के अलावा विभिन्न प्रकार की घरेलू सामग्री के स्टाल लगे है। मेला 26 मार्च तक शाम 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक चलेगा।

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