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एनसीईआरटी की पायरेटेड किताबें छापने वाले शख्स को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार

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NCERT Pirated Books: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनसीईआरटी की नकली किताब छापने वाले रैकेट के मास्टर माइंड को गिरफ्तार किया है. आरोपी का नाम मनोज जैन है, जो शाहदरा के ईस्ट नत्थू कॉलोनी का रहने वाला है. वह पिछले कई सालों से प्रिंटिंग प्रेस चला रहा है. वह पिछले कुछ समय से प्रिंटिंग प्रेस में एनसीईआरटी की पायरेटेड बुक्स छाप रहा था. पुलिस का दावा है कि मनोज पहले एक प्रिंटिंग प्रेस में नौकरी करता था, लेकिन लगभग 8 साल पहले उसने खुद का सेटअप बना लिया था. पिछले साल लॉक डाउन में उसे बिज़नेस में काफी नुकसान हुआ था, जिसकी भरपाई के लिए उसने पायरेटेड बुक्स छापने का काम शुरू किया.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश देव ने बताया कि 18 सितंबर को मंडोली के मेला राम फार्म स्थित प्रिंटिंग प्रेस में क्राइम ब्रांच की टीम ने रेड करके 5 हजार पायरेटेड बुक्स, 80 हजार प्रिंटेड शीट्स, 166 मेटालिक प्लेट, दो ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस और भारी मात्रा में एनसीईआरटी वाटर मार्क वाले प्लेन पेपर बरामद किए गए थे. इस दौरान विजिलेंस ऑफिसर और एनसीईआरटी प्रोडक्शन ऑफिसर भी पुलिस टीम के साथ थे. लेकिन रेड के बाद से इस धंधे का मास्टरमाइंड मनोज जैन तब से ही फरार चल रहा था, जिसे पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया.

मुनाफे के लिए छापने लगा पायरेटेड किताबें

पुलिस का दावा है कि पूछताछ में मनोज ने खुलासा किया कि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उसने एनसीईआरटी की पायरेटेड किताबों को छापना शुरू किया था,  क्योंकि ये किताबें पूरे भारत में बड़े पैमाने पर प्रचलन में हैं. प्राइवेट स्कूलों में पहले निजी प्रकाशन की महंगी किताबों को खरीदने के लिए छात्रों पर दवाब बनाया जाता था. इसके लिए स्कूलों को मुनाफा मिलता था. लेकिन इसकी शिकायत के बाद सरकार ने सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को अनिवार्य करने का फैसला लिया, जिससे अचानक इन किताबों की मांग में तेजी आ गई. इसी का फायदा उठाने के लिए आरोपी ने किताबों की पायरेसी का धंधा शुरू कर दिया. वह कम कीमत में दुकानदारों को किताबें उपलब्ध कराने लगा और दुकानदार भी ज्यादा मुनाफे के लालच में उन किताबों को बेचने लगे.

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